स्वतंत्रता सेनानी जोशी का निधन

चितौड़गढ़। वयोवृद्ध 87 वर्षीय स्वतंत्रता सैनानी प्रभु दयाल जोशी का बुधवार को प्रातः लगभग 11 बजे स्थानीय श्री सांवलियाजी राजकीय सामान्य चिकित्सालय में उपचार के दौरान निधन हो जाने पर उनका राजकीय सम्मान से स्थानीय डाइट रोड़ स्थित मोक्षधाम में अन्तिम संस्कार किया गया। उनके पुत्र शैलेन्द्र एवं महेश चन्द्र ने उनकी चिता को मुखाग्नि दी।
स्वतंत्रता सैनानी स्व0 श्री जोशी के निवास पर जाकर विधायक सुरेन्द्र सिंह जाड़ावत, जिला कलेक्टर डा. आरूषी . मलिक, अतिरिक्त कलेक्टर डी.सी. जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनोज चौधरी, उपखण्ड अधिकारी अमर सिंह कानावत, उप पुलिस अधीक्षक अरूण ने पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रृद्वांजलि अर्पित की तथा नगरपालिकाध्यक्ष गीता देवी ने भी उनके निवास पर जाकर शोक व्यक्त किया।
स्वतंत्रता सैनानी स्व0 श्री जोशी की पार्थिव देह को तिरंगे में लपेट कर राजकीय सम्मान के साथ प्रतापनगर स्थित आवास से उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई जिसमें विधायक श्री जाड़ावत, अतिरिक्त कलेक्टर प्रशासन श्री जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री चौधरी उपखण्ड अधिकारी श्री कानावत, उप पुलिस अधीक्षक अरूण, तहसीलदार रणधीर सिंह, जनप्रतिनिधि अधिकारी, गणमान्य नागरिक एवं श्री जोशी के परिजन शामिल हुए अन्तिम यात्रा के मोक्षधाम पहुंचने पर स्वतंत्रता सैनानी श्री जोशी की पार्थिव देह पर विधायक श्री जाड़ावत, जिला कलेक्टर डा. मलिक, अतिरिक्त कलेक्टर श्री जैन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री चौधरी ने राज्य सरकार की और से पुष्पचक्र अर्पित कर भावभीनी श्रृद्वांजलि दी तथा स्व श्री जोशी के सम्मान में सशस्त्र पुलिस की टुकड़ी ने मातमी धुन बजा कर शस्त्रा उल्टे कर, हवाई फायर के साथ उन्हैं सलामी दी।
स्वतंत्रता सैनानी स्व0 श्री जोशी कपासन तहसील के भट्टों का बामनिया निवासी थे उनका जन्म 8 जनवरी 1923 को उनके पेैतृक गांव में खेमराज जोशी के घर पर हुआ। श्री जोशी ने उदयपुर के महाराणा भूपाल कोलेज से शिक्षा ग्रहण की तथा उन्होने 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन में मेवाड़ क्षेत्र के स्वतंत्रता सेैनानी स्व0 श्री माणिक्य लाल वर्मा, नरेन्द्र पाल सिंह चौधरी, पुरूषोत्तम चौधरी, भवानी शंकर नन्दवाना एवं रामचन्द्र नन्दवाना के साथ विद्यार्थी जीवन में भाग लिया और वे 24 अगस्त 1942 से 21 सितम्बर 1942 तक उदयपुर जेल में रहे।
स्व0 श्री जोशी डाक तार विभाग के पोस्ट मास्टर के पद से सेवानिवृत थे। वे अपने पीछे दो पुत्र एवं दो पुत्रियों सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गये है।

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