काले धन की अर्थ व्यवस्था का साम्राज्य

उदयपुर, 19 अप्रेल। काले धन की अर्थ व्यवस्था का साम्राज्य प्रत्येक क्षेत्र में फैला हुआ है। इसके प्रभाव से समाज का हर वर्ग बुरी तरह प्रभावित हैं। र्दुःभाग्य है कि भारत का प्रत्येक नागरिक कालेधन की अर्थ व्यवस्था के दुश्प्रभावों का शिकार है। भ्रष्टाचार काले धन का एक हिस्सा है। कालेधन की अर्थ व्यवस्था पब्लिक तथा प्राईवेट सेक्टर का संयुक्त उत्पाद है। उक्त विचार डॉ. मोहनसिंह मेहता मेमोरियल व्याख्यान देते हुये प्रसिद्ध शिक्षाविद् तथा लेखक डॉ. अरूण कुमार ने व्यक्त किये। डॉ. कुमार ने कहा कि कालेधन की अर्थ व्यवस्था में 35 लाख करोड़ रूपया प्रति वर्ष पैदा होता है तथा 3.5 लाख करोड़ देश से बाहर चला जाता है। कालेधन की वजह से सकल घरेलू उत्पादन, सार्वजनिक सेवा, विधायिका तथा कार्यपालिका पर विपरित प्रभाव दृष्टिगत होता है। डॉ. कुमार ने बताया कि कालेधन की अर्थव्यवस्था नहीं होने पर देश का सकल घरेलू उत्पादन 7.5 की वर्तमान दर के बजाय 13 प्रतिशत होता। कालेधन की अर्थ व्यवस्था का लाभ मात्र तीन प्रतिशत की है जबकि इसके परिणाम सतानवें प्रतिशत जनता भुगतती है।
कालेधन की अर्थ व्यवस्था के कारणों की चर्चा करते हुये डॉ. कुमार ने कहा कि उपभोक्तावाद के कारण लालच की वृद्धि हुई है तथा सामुहिक सौच के बजाय व्यक्तिवादीता बढ़ी है। समाज में मिडिल मेन कल्चर आने से कालेधन की अर्थ व्यवस्था पुष्ठ हुई है। डॉ. अरूण ने कालेधन की अर्थ व्यवस्था का चित्रण करते हुये बताया कि समाज में सब चलता है कि सोच ने विकृति पैदा की है। शिक्षा तथा स्वास्थ्य जैसे ‘‘नोबल लॉज’’ को भी इस अर्थ व्यवस्था ने ‘‘नॉन नोबल’’ बना दिया है। कालेधन की अर्थ व्यवस्था ने देश के विकास की गति को मंथर बनाते हुये राजनीति को कैद कर लिया है। डॉ. अरूण कुमार ने बताया कि टैक्स रेट सतत् कम होने के बावजूद कालाधान पनपता है। अपराधी सत्ता में आते हैं इसका कारण भी काला धन है। प्रजातांत्रिक संस्थाओं की मूल्याधारित जिवन्तता तथा उनमें मूल्यों का समावेश ही काले धन पर काबू पा सकती है।
प्रश्नोत्तर करते हुये डॉ. कुमार ने कहा कि प्रश्नोत्तर करते हुये डॉ. कुमार ने कहा कि प्रजातांत्रिक व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने से ही उत्तरदायित्व आता है तथा इससे काले धन पर रोक लग सकती हैं।
विद्याभवन के अध्यक्ष रियाज तहसीन ने स्वागत करते हुये कहा कि नागरिकता की भावना के ह्रास होने से काली अर्थ व्यवस्था पनती है। विषय परिचय सेवा मंदिर की मुख्य संचालक प्रियंका सिंह ने किया तथा धन्यवाद ट्रस्ट अध्यक्ष विजय एस.मेहता ने ज्ञापित किया।
पूर्व विदेश सचिव प्रो. जगत एस. मेहता, पूर्व कुलपति जेएनयू प्रो. एम.एस. अगवानी, सेवामंदिर के वरिष्ठ प्रन्यासी मोहन सिंह कोठारी, समाजसेवी रवि भंण्डारी, समाजविद किशोर संत, समाजनैत्र्ाी विजया खान, हिन्द जिकं के पूर्व निदेशक डॉ. एच.बी. पालीवाल, सेवामंदिर की पूर्व मुख्य संचालक नीलिमा खेतान, नारायण आमेटा, महाराज कुमार जयसिंह, डूंगरपुर, ट्रस्ट सचिव नन्द किशोर शर्मा आदि ने भाग लिया े।

डॉ. मोहनसिंह मेहता की 116 वी जन्मतिथि की पंुर्व संध्या पर आयोजित व्याख्यान से पंुर्व स्व. मेहता की प्रतिमा पर पूर्व विदेश सचिव प्रो. जगत एस. मेहता एंव डॉ. अरूण कुमार ने दीप प्रज्वलन एंव मालार्पण किया

सादर प्रकाशनार्थ।
नन्द किशोर शर्मा
ट्रस्ट सचिव

Share on Google Plus

About amritwani.com

This is a short description in the author block about the author. You edit it by entering text in the "Biographical Info" field in the user admin panel.
    Blogger Comment
    Facebook Comment