भामाशाही परम्पराएँ आज भी चित्तौड़ की पहचान है- कलेक्टर रवि जैन

चित्तौड़गढ़ जैसा मेवाड़ी प्रदेश आज भी देश भर में अपनी भामाशाही परम्पराओं के जरिये दान वीरों से भरा हैं जहां साल दर साल जुलाई में स्कूल के निर्धन और प्रतिभावान विद्यार्थियों को शिक्षण सहायक सामग्री वितरित की जाती रही हैं। लाभांवित बच्चे अपने घर-परिवार और विद्यालय समाज का नाम रोशन करेंगे, तो दानवीरों का दान भी संतुष्टि पायेगा।
यह विचार चित्तौड़गढ़ के जिला कलेक्टर रवि जैन ने भगवान महावीर मानव सेवा समिति चित्तौड़गढ़ द्वारा नगर की जैन धर्मशाला में 22 जुलाई को आयोजित निःशुल्क गणवेश वितरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किये। सुबह 9ः00 बजे शुरू हुए कार्यक्रम में चित्तौड़गढ़ और आस-पास के क्षेत्र के 14 शैक्षणिक संस्थानों के 691 बालक-बालिकाओं को निःशुल्क स्कूली पोशाक वितरण की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिला पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने भी अपने संक्षिप्त उद्बोधन में दानवीर को कर्मवीर से भी ऊँचा स्थान दिया और कहा कि दान देने के लिए असल मायनों में बड़े दिल की जरूरत होती है, न कि धन दौलत के भण्डार की। एक बात और कि भारत के विश्व शक्ति बनने के क्रम में यह बात भी बड़ी मायने रखती है कि निर्धन और सबसे आखिरी व्यक्ति कितना सुरक्षित और मजबूत हैं। संस्था के अध्यक्ष और आयोजन समन्वयक शिक्षाविद डॉ. ए.एल. जैन ने संस्था के 2004 से अबतक हुई गतिविधयों के बारे में जानकारी देते हुए अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि सीधे रूप से भारत की दो तस्वीरें बन चुकी है। जहाँ असली भारत सरकारी स्कूलों में भर्ती हैं और इण्डिया निजी स्कूलो में शिक्षा पा रहा हैं। हमें घर से बाहर निकलकर थोड़ा-सा इस असली भारत के बारे में भी सोचने की जरूरत हैं।
कार्यक्रम में शामिल 14 संस्थानों में उप्रावि गाड़ी लौहार, उप्रावि सेगवा, उप्रावि बराड़ा, नवीन प्राथमिक विद्यालय प्रतानगर, बालिका उप्रावि स्टेशन, आदर्श उप्रावि लालजी का खेड़ा, बालिका उप्रावि सेंती, उप्रावि (बालक) सेंती, उप्रावि ओछड़ी, उप्रावि पुलिस लाईन, उप्रावि कच्ची बस्ती गांधीनगर, उप्रावि कुम्भानगर, उप्रावि लक्ष्मीपुरा, उप्रावि प्रेमनगर के संस्था प्रधान और प्रतिनिधि अध्यापक शामिल थे। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत संरक्षक हीरालाल दोषी, लक्ष्मीलाल उपाध्याय, चैनसिंह खेरी, चन्द्रभान, उपाध्यक्ष राजेन्द्र दोषी, स्पिक मैके अध्यक्ष जे.पी. भटनागर, डॉ. आर.एल. मारू, एन.के. मेहता ने माल्यार्पण द्वारा किया। अन्त में आभार संस्था सचिव एम.एल. मेहता ने प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन अपनी माटी वेबपत्रिका सम्पादक माणिक ने किया।
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