मनुष्य का अभिमान खत्म होने पर ही भगवान अपनाते है

 चित्तौड़गढ -जब तक मनुष्य में घमण्ड अभिमान हैं तब तक भगवान उस व्यक्ति को न तो अपनायेंगे और न ही उसके सम्मुख अपनी उपस्थिति प्रकट करेंगे अपितु जिस व्यक्ति ने अभिमान त्याग कर अपनी प्रतिष्ठा ईद्गवर के हाथों में सोंप दी हैं उससे भगवान का साक्षात्कार होगा ही। यह विचार भागवत्‌ भूषण श्री जगदीद्गा प्रसाद द्गाास्त्री (वामन महाराज) वृन्दावन वाले ने श्री त्रिपोलिया हनुमान मन्दिर गांधीनगर चित्तौड गढ में भागवत कथा के चौथे दिवस उपस्थित भक्तों के सम्मुख अपने मुखारविन्द से प्रकट किये हैं। ओर बताया कि अपने तन, मन को ईद्गवर को अर्पण करदें तो उसकी रक्षा स्वंय ईद्गवर करेगा क्योंकि वह ईद्गवर की सम्पत्ति हो जाती हैं जिसे कोई नष्ट नहीं कर सकता हैं।
                                               

                    कृष्ण जन्मोत्सव पर झुमे लोग
कथा के चोथे दिवस पर कृष्ण जन्मोत्सव के तहत आर्कषक झांकी सजाई गयी जिसमें वासुदेव रूप में राधेद्गयामजी एंव बालकृष्ण रूप में बालकृष्ण मोड़ ने रूप धरा  जिसकी भक्तजनों ने आरती उतारी व महाराज श्री ने कृष्ण जन्मोत्सव पर नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गीत प्रस्तुत किया जिस पर सभी भक्त अपने स्थान से खडे होकर नृत्य करने लगे बधाईयॉं बटने लगी।







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