ठाकुर श्री कल्लाजी के दरबार में घूमधाम से मना फागोत्सव

गुलाब गुलाल व अबीर और पलाश के फूलो के रंग से भक्तो और भगवान ने जमकर खेली होली
निम्बाहेडा़ 27 मार्च। मेवाड़ के प्रसिद्व श्री शेषावतार कल्ला जी वेदपीठ पर घुलण्डी पर्व  पर फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा बुधवार को भव्य फागोत्सव धूमधाम से मनाया गया जिसमें हजारो श्रृद्वालुओ ने उत्साह के साथ फाग खेला ।  वेदपीठ पर फागोत्सव के आयोजन में पलाश के फूलो से ठाकुर जी सहित पंचदेवो की अष्ठधातु की चमत्कारिक प्रतिमाओ का मनभावन श्रंृगार किया गया जिनकी मनोहारी छवि देखते ही बनती थी। वहीं समूचा मंदिर परिसर रंग बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया था।
   
प्रातः से ही कल्याण भक्त ठाकुर जी के दर्शनार्थ मन्दिर पहुॅचने लगे और जब लोक भजन गायको द्वारा फागुन के रसिया की तर्ज पर गणपति वन्दना के रूप में रणतभवॅर गढ़ खेले गणपति होली से फागोत्सव का शुभारम्भ हुआ और जब  ‘‘ ठाकुर कल्ला जी के द्वार मची है होरी‘‘ लोक भजन प्रारम्भ किया गया  तो समुचा परिसर खचाखच भरा हुआ था। इसी दौरान जब ‘‘होरी खेलन दाता निम्बाहेडा में आईजोजी‘,..... होरी खेले रे कल्याणकुवर संग कृष्णा होरी खेले रे, ....आओ आओ जी कल्याण आपा खेला होरी, .....साथ में सहेलिया संग कृष्णा गौरी, देखो-देखो कल्ला जी खेले होरी, ....महिनो फागण को कल्ला जी थाकी औल्यूं आवे रे, थे होली खेलण आओ निम्बाहेड़ा, होली आयी जी कल्ला जी थे तो आवो जी कल्लाजी, एक बार आओ जी कल्लाजी म्हारे पावणा, हिलमिल खेला होली कृष्णा रा भरतार, जैसे भजन प्रस्तुत किये जाने लगे तो  ऐसा लगा मानो साक्षात ठाकुर जी भक्तो के बीच विविध स्वरूप मे यहाॅ प्रकट होकर होली खेल रहे हो। ज्यो ही प्रातः 11.30 बजे राजभोग की झांकी के पट खुले तो समुचा वातावरण ठाकुर जी के जयकारो से गूंज उठा और इसी के साथ जब ‘‘ होलियों मे उडे रे गुलाल कल्ला जी थारा मन्दिर में ‘‘ भजन प्रारम्भ हुआ त्योही ठाकुर जी की और से गुलाब की पखंुडि़या और भीनी भीनी महक वाली सतरंगी गुलाल अबीर भक्तो पर छिडकी जाने लगी तो दूसरी और केसर और पलाश के फूलो से केसरिया रंग की पिचकारी से भक्तो को सराबोर किया जाने लगा इस अनूठी होली का दृश्य हर कोई अपने नैत्रो में समेटने के साथ ही हर भक्त ठाकुर जी के रंग में रंग जाने को आतुर था। इतना ही नही भक्त गण अपने आराघ्य को रंग बिरंगी गुलाल अबीर से होली खेला कर एसी अनुभूति कर रहे थे मानो ठाकुरजी भी उनके साथ होली खेलने को आतुर है। मन्दिर के चैक में ढोल की थाप पर नृत्य करते भक्त गण अपने आराघ्य को रिझा रहे थे तो युवा जयकारो के साथ वर्ष पर्यन्त सर्वत्र मंगल की कामना कर रहे थै। पलास के फूलो से बने केसरिया रंग से देर तक होली खेलने के बाद भी देर रात तक दर्शनार्थियो का तांता लगा रहा ।  दूर-दूर से आये भक्तों ने फागोत्सव की झलक देखने के  बाद कहा कि भक्त और भगवान का एकाकार स्वरूप वर्ष में फागोत्सव के समय पर वेदपीठ पर ही देखने को मिलता है जो अपने आप में अनूठी धार्मिक परम्परा का परिचायक बन गया है। फागोत्सव के दौरान समुचा वेदपीठ परिसर
गुलाब के पुष्प ,इत्र और अबीर गुलाल की भीनी-भीनी महक से घमक उठा वही मंदिर और चैक पर गुलाल और गुलाब के फुलो की मोटी परत जम गयी । फागोत्सव के लिये जहाॅ वेदपीठ की और से सवा क्विटंल से अधिक आरारोट की गुलाल मंगवायी गयी थी वही इससे अधिक गुलाल भक्तों द्वारा भेंट की गयी थी । वेदपीठ की परम्परा अनुरूप फागोत्सव पर पारम्परिक रंगों और गुलाल अबीर से होली खेलने के प्रति कल्याण नगरी के हर आयु वर्ग और हर समाज मेे खासा उत्साह देखने को मिला हर कोई अपने आराध्य के साथ सौभाग्य से मिले इस अवसर पर होरी खेल कर भक्त और भगवान के एकाकार स्वरूप को मन मे बसाने को आतुर था । मध्यान में मंदिर और आस पास के मकानों की छतों से पुष्प वर्षा का विहंगम दृश्य देखते ही बनता था।
गुलाल आरती - वेदपीठ पर फागोत्सव की धूम के साथ इस बार गुलाल आरती का दृश्य भक्तों को मोहित कर रहा था । जब मध्यान्ह में भक्त और भगवान की होली का आयोजन सम्पन्न हुआ तो ठाकुर श्री कल्ला जी की गुलाल आरती की गयी । जिसके सम्पन्न होने पर भक्तों ने पुष्पांजली के साथ-साथ सतरंगी गुलाल और अबीर ठाकुरजी पर न्यौछावर कियें । वहीं कई भक्त गण सतरंगी अबीर गुलाल की पुडिया बांध कर अपने परिजनों के लिए ले जाते हुए देखे गये। 
वेद विध्यालय में प्रवेश हेतु आवेदन पत्र आमंत्रित- श्री शंेषावतार कल्ला जी वेद पीठ एंव शोध संस्थान द्वारा संचालित वेद विध्यालय में नव प्रवेषी छात्रों से आवेदन पत्र आमंत्रित किये गयें है। वेद विध्यालय के आचार्य ने बताया कि वेद पीठ द्वारा 1 अप्रेल से 31 मई तक निषुल्क आवेदन पत्र प्राप्त कर जमा कराये जा सकते है। उन्होंने बताया कि इस विध्यालय में शुक्ल यजुर्वेद के अध्ययन के लिए पांचवी कक्षा उतीर्ण 12 वर्ष आयु तक के बालक आवेदन कर सकतें है। आगामी एक व दो जून को आवेदक छात्रों की लिखित व मौखिक प्रवेष परीक्षा ली जायेगी। उल्लेखनीय है  िकइस विध्यालय में निषुल्क आवासीय वैदिक षिक्षा की व्यवस्था सुलभ है।

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