सतरंगी यादों के साथ चित्तौड़गढ़ आर्ट फेस्टिवल का समापन

चितौड़गढ़ कस्बे में चित्रकारों और विद्यार्थियों की रूचि के लिहाज से आयोजित नौ दिवसीय चित्तौड़गढ़ आर्ट फेस्टिवल तीन जनवरी की शाम समाप्त हो गया अपनी शुरुआत से लेकर आखिर तक पहली बार आयोजित इस रंगोत्सव में चार राज्यों के छत्तीस कलाकारों ने अपनी कृतियाँ फ़तेह प्रकाश महल स्थित संग्रहालय में प्रदर्शित की जिसे हजारों दर्शकों ने सराहा। जिले के तीस विद्यार्थियों ने पहली बार एतिहासिक इमारतों के माहौल में पांच कलागुरुओं के सानिध्य में चित्रकारी का आनंद लिया।पंद्रह युवा चितेरों ने आर्ट केम्प में आकर बच्चों का उत्साहवर्धन भी कियातीन जनवरी शाम पांच बजे सैनिक स्कूल के शंकर मेनन सभागार में आयोजित समापन सत्र में कार्यशाला में तैयार कृतियों का प्रदर्शन किया गया जिन्हें देख अभिभावकों सहित अतिथियों की खूब प्रशंसा मिली। चित्रकारी जैसी ललित कला के संवर्धन को लेकर किए गए इस आयोजन के संयोजक मुकेश शर्मा ने आत्मिक शान्ति का ज़रिया बताया और कहा कि बीते महीनों विश्वभर में चारों तरफ से लगातार अशांत करने वाली खबरें आती रही तो हमें लगा कि समाज में कुछ सृजनात्मक गतिविधि करके ही हम जीवन में समन्वय पैदा कर सकते हैं और वही हमने किया भी

समापन सत्र में आए हुए अतिथियों का स्वागत सोसायटी के राहुल यादव, दीपिका शर्मा, मनीष भगत, प्रतिभा यादव, रुकैया शैख़, सुब्दोह जोशी और नीतू ढील ने किया। स्वागत उदबोधन सलाहकार डॉ. ए.एल.जैन ने दिया दीप प्रज्ज्वलन के बाद जहां एक तरफ सैनिक स्कूल के छात्र नवनीत आनंद ने चित्रकारी कार्यशाला के अपने अनुभव सुनाए वहीं दूसरी तरफ चित्रकार मनोज कुमार यादव ने जीवन में कला और संस्कृति के महत्व पर अपनी बात कही। कॉलेज व्याख्याता डॉ. अभिनव कमल रैना ने अपने निजी जीवन के अनुभव से बच्चों को दर्शाया कि सिखने की कोई उम्र नहीं होती बशर्ते कि आपमें रूचि और दिशा हो। इस मौके पर प्रतिभागी विद्यार्थियों, स्वयंसेवकों और चित्रकारों को सम्मानित किया गया। कपासन के
चित्रकार और शोधार्थी मोहन लाल मोची ने अपनी बनायी दो पोट्रेट भी भेंट की जिन्हें देख पूरा सभागार आश्चर्य चकित रह गया।बतौर विशिष्ट अतिथि श्रमिक नेता घनश्याम सिंह राणावत ने इस तरह के आयोजन को आगे बढ़ाने की पैरवी की वहीं वहीं प्रयास संस्था सचिव डॉ. नरेन्द्र गुप्ता ने कहा कि किसी भी शहर को बेहतर रुचियों से संपन्न आयोजन देने के लिए हमें लगातार प्रयास करना होगा और इस सफर में सिनेमा, चित्रकारी, साहित्य और रंगमंच जैसे ज़रूरी क्षेत्रों का ख्याल रखते हुए कार्यक्रम गढ़ने चाहिए अतिथि वक्ताओं में चित्तौड़गढ़ अर्बन को-ओपरेटिव बैंक के अध्यक्ष आई.एम.सेठिया ने जीवन के किसी भी पड़ाव पर कुछ कर गुज़रने के लिए ठोस योजना और निर्णय के साहस को ज़रूरी बताया
बतौर मुख्य अतिथि सैनिक स्कूल के प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल अजय ढील ने सभी अभिभावकों और प्रतिभागियों को इस तरह के कदम से जुड़ने पर तारीफ़ की और अपने संस्थागत योगदान को आगे भी देने का वादा किया।उन्होंने कहा कि निस्वार्थ भाव से किए गए ऐसे तमाम आयोजन सदैव एक शहर को अपनी सम्पूर्णता प्रदान करते हैं।समाज में सृजन की ऐसी सभी कोशिशों को हमें अपने-अपने ढंग से आगे आकर प्रोत्साहित करना चाहिए। समापन सत्र में स्पिक मैके के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य जे.पी.भटनागर और कवि डॉ.ए.बी.सिंह भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजन में अपनी माटी के उपाध्यक्ष अब्दुल ज़ब्बार, स्पिक मैके सचिव संयम पुरी, पूरण रंगास्वामी, हेमेन्द्र सोनी, अज़ीम प्रेमजी फाउन्डेशन के समन्वयक मोहम्मद उमर, मिनिएचर कलाकार गुलशन जांगिड़, चित्रकार लक्ष्मीनारायण वर्मा, विजय बैरवा, घनश्याम सिंह, दिनेश रेगर सहित बड़ी संख्या में अभिभावक भी मौजूद थे। आभार संयोजक मुकेश शर्मा ने दिया
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