महावीर के आत्मतत्व ज्ञान को जीवन में अंगीकार करें-डाॅ शिव मुनि


श्रमण संघीय चतुर्थ पट्टधर आत्म ज्ञानी आचार्य सम्राट डाॅ शिव मुनि महाराज ने कहा कि देह का सम्बंध शास्वत नहीं है वहीं परिवार धन दौलत भी शास्वत नहीं रहते ऐसे में भगवान महावीर के आत्मतत्व ज्ञान को जीवन में अंगीकार कर आत्मा से परमात्मा को जोड़ने का प्रयास करें। डाॅ शिवमुनि शुक्रवार को शम्भुपुरा में वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ द्वारा नव निर्मित भगवान महावीर जैन दिवाकर स्वाध्याय भवन के पुणे निवासी भामाशाह रसीकलाल एम शाह तथा बाला साहेब रतन चंद्र धोखा द्वारा उद्घाटन करने के पश्चात श्याम बगीची में आयोजित विशाल धर्म सभा को सम्बोधित कर रहे थे। आचार्य श्री ने ध्यान योग के माध्यम से श्रृद्धालुओं को आत्मज्ञान को परिचय कराते हुए कहा कि आत्मा श्वास से जुड़ी हुई है जिसका स्वभाव दृष्टा का है। उन्होंने बताया कि दिल्ली से यहा तक हजारों लोगो ने ध्यान शिविर में भागीदार बनकर जीवन में शांति का अनुभव किया है और महावीर की प्रेरणा से करूणा व मैत्री भाव की आज जगत को जरूरत है। उन्होंने कहा कि जीवन में दान का विशेष महत्व है लेकिन दान पर अहंकार नहीं होना चाहिए। इस छोटे से गांव में नवनिर्मित स्थानक के
लिये आयोजको व भामाशाह के लिये मंगल कामनाएं करते हुए कहा कि महावीर के मैत्री और करूणा के संदेश को घर-घर पहुंचाये तथा जीवन का रूपांतरण करने के लिये अहिंसा दूत बनकर प्राणी मात्र के लिय मंगल भावनाएं रखे। इस अवसर पर नेपाल केसरी मनी भद्र मुनि जी ने गीतिका के रूप में ‘‘मेरी लगी गुरू संग प्रित दुनिया क्या जानें‘‘ के माध्यम से गुरू वंदना करते हुए गुरू व संत से आशीर्वाद के महत्व पर प्रकाश डाला। इससे पूर्व श्रमण संघ मंत्री महेंद्र ऋषि द्वारा मंगलाचरण के रूप में णमोकार मंत्र का जाप किया गया। समारोह में श्रावक संघ के स्थानीय अध्यक्ष मिश्रीलाल कोठारी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि
आचार्य संम्राट व अन्य संतो की कृपा के साथ भामाशाहों के योगदान से यहा स्वाध्याय भवन का निर्माण हुआ है जिसके उद्घाटन समारोह में आये डाॅ शिवमुनि से ऐसी अनुभूति हुई मानों शबरी के घर राम आये हो। वंदना बोहरा ने स्वागत ज्ञान प्रस्तुत करते हुए कहा कि शम्भुपुरा के भक्ति इतिहास मे ंआचार्य श्री के आमगन से एक स्वर्णिम प्रशन जुडा है, आनंद रत्न गु्रप के बाला साहेब रतनलाल धोखा ने आचार्य श्री को नमन करते हुए जब अपने ही अंदाज में भाामशाहों को प्रेरित किया तो धर्म सभा में ही स्वाध्याय भवन के लिये करीब 7 लाख के दान की घोषणा की गई। मेवाड़ी माटी के लाल शिरिष मुनि जी महाराज ने भी आशीर्वचन दिया। इस अवसर पर श्रावक संघ की ओर से समारोह के अध्यक्ष मुम्बई के नरेश लोढा, मुख्य अतिथि शांतिलाल भड़कत्या, अशोक डांेगरे, उंकार सिंह सिसोदिया, जसवंत कुमार कोठारी के साथ ही स्वाध्याय भवन का स्वप्न साकार होने पर मिश्री लाल कोठारी भूखण्ड भंेटकर्ता शंकर लाल बडाला का शाॅल ओढा कर अभिनंदन किया गया। इससे पूर्व आचार्य श्री को अरनियापंथ से बड़ी संख्या में जैन श्रृद्धालुओं ने भगवान महावीर के जयकारें के साथ अगवानी करते हुए गांव में मंगल प्रवेश कराया। धर्म सभा में भी हजारों लोगो ने श्रृद्धा व उत्साह के साथ भाग लिया। आचार्य सम्राट संतो के साथ शुक्रवार को अपरान्ह यहा से निम्बाहेड़ा के लिये विहार कर गये। 

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