सचाई की राह अपना लेना ही कबीर को समझना है

चित्तौड़गढ़ 13 सितम्बर 2015 शबनम विरमानी की डोक्युमेंट्री फिल्मों ने जनमानस में कबीर को लेकर बहुत ज़रूरी और चेतना जगाने जैसा काम किया है।सन दो हजार दो में कबीर यात्रा प्रोजेक्ट के तहत बनी और दिखाई गई दो फिल्मों के प्रदर्शन और चर्चा से साफ़ है कि निरक्षर कबीर आज विश्वभर पढ़े और अपनाएं जा रहे हैं। यह हमारे देश के लिए फ़क्र की बात सांस्कृतिक-सामाजिक रूप से समृद्ध जीवन अनुभव यहाँ अकादमिक पढ़ाई-लिखाई पर भारी पड़ता नज़र आया है।हमारे समय में आलोचना की
परम्परा और सच को सच कहने की हिम्मत को लगातार हतोत्साहित किया गया है। मानव जीवन को सचाई की राह पर ले आना ही कबीर को सही मायने में जान लेना हैसत्य,निर्गुण भ्रह्म और गुरु को लेकर कबीर का चिंतन आज और ज्यादा सटीक और ज़रूरी जान पड़ता है।समाज सुधार की कई राहें आज कबीर से ही निकल सकती है इस बात पर विचार किया जाना चाहिए लगभग कर्मकांड विरोधी और संगीतपरक फिल्मों की यह चर्चा हमें पंद्रहवीं शताब्दी के प्रगतिशील कवि कबीर,शास्त्रीय गायक पंडित कुमार गन्धर्व और कबीरपंथी गायक प्रहलाद सिंह तिपानियाँ को जानने का बेहतर मौक़ा अनुभव हुयी
यह निष्कर्ष प्रतिरोध का सिनेमा की चित्तौड़गढ़ इकाई द्वारा तेरह सितम्बर की दोपहर सेन्ट्रल एकेडमी सीनियर सेकंडरी स्कूल,सेंथी में आयोजित फ़िल्म स्क्रीनिंग में निकल कर आया आयोजन की शुरुआत में चित्तौड़गढ़ फ़िल्म सोसायटी के साथी अश्लेश दशोरा ने सभी का स्वागत किया और विजन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट के प्रोफ़ेसर महेंद्र नंदकिशोर ने प्रख्यात कन्नड़ लेखक एम.एम.कलबुर्गी पर केन्द्रित एक प्रजेंटेशन दिया जिसे खूब सराहा गया। कुमार गन्धर्व केन्द्रित कोई सुनता है और गायक प्रहलाद सिंह तिपानिया केन्द्रित चलो हमारा देस का प्रदर्शन किया गया।फिल्मों का परिचय सोसायटी के साथी जितेन्द्र यादव ने दिया
इस मौके पर चित्तौड़गढ़ फ़िल्म सोसायटी से जुड़े कामरेड आनंद छिपा, आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिकारी लक्ष्मण व्यास, अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन के समन्वयक मोहम्मद उमर, स्पिक मैके सहसचिव शाहबाज पठान, जुनेद, चित्रकार मुकेश शर्मा, गीतकार अब्दुल ज़ब्बार, गोवर्धन बंजारा, मनोज खोईवाल, डॉ.आर.के.दशोरा, मानवाधिकार कार्यकर्ता जी.एन.एस.चौहान, अपनी माटी सचिव डालर सोनी सहित विजन स्कूल ऑफ़ मैनेजमेंट के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया इस अवसर पर आगामी पच्चीस से सताईस सितम्बर तक आयोज्य उदयपुर फिल्म फेस्टिवल में जाने वाले साथियों की भी बैठक आयोजित की गयी जिसका संचालन माणिक और डॉ. राजेश चौधरी ने किया
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