भव्य शोभा यात्रा के साथ सांवलिया सेठ का त्रिदिवसीय जलझूलनी एकादशी मेला प्रारम्भ

पहले ही दिन मेले में उमड़ी भीड़ अपार: अश्व नृत्य व पंजाबी बैण्ड रहा आकर्षण का केन्द्र
मण्डफिया 23 सितम्बर / उत्तर भारत के प्रमुख कृष्णधामों में से एक मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम मण्डफिया स्थित श्री सांवलिया जी का त्रिदिवसीय जलझूलनी एकादशी मेला भाद्रपद शुक्ला दशमी बुधवार को सांवलिया सेठ की भव्य शोभा यात्रा के साथ प्रारम्भ हो गया। पहले ही दिन जन-जन के आराध्य कृष्ण भक्तों की भारी भीड़ ने सांवलिया धाम को गोकुल वृन्दावन निरूपित करने में कोई कोर कसर नहीं रखी। कृष्ण नगरी के रूप में भारतीय मानचित्र पर अनूठी छाप रखने वाले मण्डफिया कस्बे में चहूं ओर अपार जन गंगा उमड़ पड़ी। सांवलिया सेठ के मुख्य मंदिर से ज्यों ही ठाकुर श्री सांवलिया जी का बेवाण बाहर लाया गया तो समूचा परिसर सांवलिया सेठ के जयकारों से गूंज उठा। वहीं भक्तों ने हाथी-घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की के उद्घोष के साथ वातावरण को कृष्ण भक्ति से सराबोर कर दिया। मंदिर से श्री सांवलिया सेठ का बेवाण बाहर लाया गया तो कोरी डोर में मंदिर मण्डल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेशचन्द्र अध्यक्ष भैरूलाल गुर्जर एवं मण्डल के सदस्यों ने भगवान सांवलिया सेठ की अगवानी की। बेवाण के साथ ओसरा पुजारी चुन्नीदास चंवर ढुलाते हुए सांवलिया जी को मान मनुहार कर नगर भ्रमण का आमंत्रण देते दिखाई दे रहे थे। अपनी प्रकार की यह अनूठी शोभा यात्रा भक्तों के लिए आल्हादित करने वाली थी, जिसमें 50 से अधिक मालवीय ढोल की थाप के  साथ नीमच का सुभाष बैण्ड, कानोड़ का सांवलिया बैण्ड, मण्डफिया का सांवलिया बैण्ड, मन्दसौर का शिवम बैण्ड भजनानन्दी स्वर लहरिया बिखेर रहा था। वहीं हाथी, घोड़े, ऊंट ध्वज, शतरंगी निशान रजत छड़ी, घोटे शोभा यात्रा को द्विगुणित कर रहें थे। यह शोभा यात्रा घण्टा घर के सामने से राधाकृष्ण मंदिर, गढी का देवरा, मस्जिद् के पास होते हुए, कबुतर खाना, ब्रह्मपुरी, जैन मोहल्ला सदर बाजार जैन मंदिर होते हुए पुनः मंदिर परिसर में पहूंची। इस दौरान पूरे मार्ग में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ ने आत्मिकभाव से अपने आराध्य सांवलिया सेठ के दर्शन कर स्वयं को धन्य किया, वहीं बड़ी संख्या में श्रृद्धालु नर-नारी भजनों पर नृत्य करते हुए सांवलिया सेठ को रिझाने में लगे हुए थे।
मोहित किया सांवलिया जी की छवि ने
एकादशी मेले के उपलक्ष्य में भाद्रपद शुक्ला दशमी को सांवलिया सेठ का मनभावन श्रृंगार इतना अनुपम था कि मंदिर में दर्शनार्थ आने वाले हर भक्त को उनकी यह मनमोहक छवि आकर्षित कर रही थी। कई दर्शनार्थी तो लम्बी कतारों के बाद निज मंदिर में पहुंचकर अपने आराध्य की चित्ताकर्षक छवि को अपलक निहारते रहे।
फतह फोजी पाईप बैण्ड बना प्रमुख आकर्षण
सांवलिया जी के मेले में प्रथम बार पंजाब के भटिन्डा से आए नौ सदस्यीय फतह फोजी पाईप बैण्ड की प्रस्तुतियों ने मेलार्थियों को खूब आकर्षित किया। बैण्ड मास्टर बलवीरसिंह के नेतृत्व में बैण्ड के कलाकारों ने पंजाबी धुन पर अपने ही अंदाज में मार्च पास्ट व सलामी की तर्ज पर दु्रत चाल में प्रस्तती देकर समुचे माहोल को पंजाबी रंग में रंग दिया। 
सांवलिया संग होली
वैसे तो फाल्गुन मास में पूरे देश में होली खेली जाती है, लेकिन सांवलिया सेठ के दरबार में जलझूलनी एकादशी मेले के प्रथम दिन शोभा यात्रा में हर कोई सतरंगी अबीर-गुलाल से होली खेल कर सांवलिया के रंग में रंगने को आतुर दिखाई दिया। 
आकर्षक रही झांकियां
जलझूलनी एकादशी मेले के प्रथम दिवस बुधवार को सांवलिया सेठ की भव्य शोभा यात्रा में नगर की शिक्षण संस्थाओं द्वारा शामिल की गई झांकियां आकर्षण का केन्द्र रही। जिनमे आदर्श उ0मा0 की सरस्वती वन्दना, आदर्श विद्या निकेतन का वाल्मिकी आश्रम तथा सांवलिया शिक्षण संस्थान की नृसिंह अवतार की झांकी ने लोगों को खूब आकर्षित किया।
अश्वों ने दिखाए करतब
सांवलिया सेठ के मेले में उमण्ड, घोड़ा खेड़ा, सोहनखेड़ा, भूतखेड़ा, रेलमगरा सहित कई गांवों से अश्व पालक अपने प्रशिक्षित अश्वों को लाकर उनके नृत्य के साथ करतब दिखाते हुए खुब वाहवाही लूट रहे थे। इन अश्वों में चेतक, अशोक, मोहन, रानी, जैसे कई नामों के अश्वों ने बैण्ड की धुन व ढोल की थाप पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुत करते हुए सांवलिया सेठ को नमन कर उनसे आशीर्वाद लेने में कोई कोर कसर नहीं रखी, तो अश्व पालक भी अपने अश्वों के करतब दिखाकर दर्शकों को तालियां बजाने को विवश कर दिया।
सतरंगी रोशनी से सराबोर हुआ मंदिर परिस
जलझूलनी एकादशी मेले के उपलक्ष्य में सांवलिया सेठ के मुख्य मंदिर सहित समूचा कोरी डोर परिसर सतरंगी रोशनी से सराबोर है। जिसे काफी दूरी से भी देखने पर बरबस ही जन साधारण के आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। मंदिर मण्डल द्वारा प्रथम बार मेले के अवसर पर भव्य रोशनी से परिसर को सुसज्जित किया है।
चाक-चैबन्द सुरक्षा व्यवस्था
मंदिर मण्डल द्वारा जलझूलनी एकादशी मेले के
अवसर पर चाक-चैबन्द सुरक्षा व्यवस्था की गई है। जिसके तहत कोरी डोर परिसर में ही लगभग 150 सुरक्षा प्रहरी तेनात किए गए है वहीं मेले के दौरान कानून एवं शान्ति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेला मजिस्ट्रेट सहित पर्याप्त मात्रा में पूलिस जाब्ता भी तेनात किया गया है।
अनूठा बना मेला बाजार
मेले के दौरान कस्बा वासियों की लगभग 300 स्थाई दुकानों के अलावा देश और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 500 व्यवसायी भी नानाविध सामग्री के साथ मेला परिसर में दूकानें लगाए हुए है जहां श्रृंगार प्रसाधन, पूजा सामग्री, मणिहारी, बच्चों के खिलौने, खाने-पीने की सामग्री के साथ ही हर प्रकार की वस्तुएं एक ही परिसर में उपलब्ध होने से मेलार्थी भी अपनी रूचि के अनुसार खरीददारी कर रहे है।
भव्य रजत रथ यात्रा आज
सांवलिया सेठ के त्रिदिवसीय मेले का मुख्य समारोह जलझूलनी एकादशी के उपलक्ष्य में आज आयोजित होगा। जिसमें जन-जन के आराध्य सांवलिया सेठ रजत रथ में विराजित होकर नगर भ्रमण करते हुए अपने अपार भक्तों को दिव्य दर्शन देंगे। इस रथ यात्रा में देश के कोने-कोने से आने वाले लाखों श्रृद्धालुओं से यह मेला लक्खी मेला बना जाता है।
हेलीकाॅप्टर से पुष्प वर्षा
जलझूलनी एकादशी के पावन अवसर पर निकलने वाली रजत रथ यात्रा के दौरान वर्ष 1991 के बाद पहली बार हेलीकाॅप्टर से पुष्प वर्षा लाखों भक्तों के लिए मुख्य आकर्षण होगी। जिसके लिए मंदिर मण्डल द्वारा 16 क्ंिवटल गुलाब मंगवाए गए है वहीं रथ यात्रा के दौरान सांवलिया संग होली खेलने के लिए 25 क्ंिवटल अरारोट की भीनी-भीनी महक वाली सतरंगी गुलाल मंगाई गई है। 
आज के मुख्य आयोजन
मेले के दौरान रेफरल चिकित्सालय के समीपस्थ मंच पर रात्रि आठ बजे से दलेर मेहंदी एण्ड ग्रुप द्वारा अपने ही अंदाज में मन भवन प्रस्तुतियां दी जाएगी। वहीं इसी मंच पर मध्य रात्रि से शंकर कैसेट जयपुर से कलाकार सांस्कृतिक एवं आर्केस्ट्रा कार्यक्रम देंगे। मंदिर परिसर के समीप के मंच पर मुजफ्फरनगर उत्तरप्रदेश के शर्मा बन्धुओं की भजन संध्या के बाद मध्य रात्रि से भूमिका मीडिया इवेन्ट्स नई दिल्ली की और से लोकनृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम, गोवर्धन बस स्टेण्ड के मंच पर समृद्धि फिल्म के सौजन्य से भजन संध्या एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद मध्य रात्रि से मोहम्मद वकील सारेगामापा एवं महेश गोयल डांस ग्रुप द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम व आर्केस्ट्रा के आयोजन होंगे। 
सतरंगी आतिशबाजी
लेकसिटी फायरवक्र्स द्वारा भव्य रजत रथ यात्रा की वापसी के बाद रात्रि आठ बजे से मंदिर परिसर के सामने सतरंगी आतिशबाजी भी लोगों के लिए मुख्य आकर्षण होगा।


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