सांवलिया सेठ की रजत रथ यात्रा में उमड़ी भीड़ अपार

अबीर, गुलाल एवं गुलाब की पांखुडि़यों ने मण्डफिया को निरूपित किया गोकुल
मण्डफिया 24 सितम्बर / उत्तर भारत की प्रमुख कृष्णधामों में से एक मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम मण्डफिया स्थित सांवलिया सेठ के जलझूलनी एकादशी मेले के मुख्य दिवस गुरूवार को आयोजित रजत रथ यात्रा में अपार भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर के कोरी डोर से लेकर चारों और जहां भी नजर जाती थी, उधर अपार जन गंगा अपने आराध्य सांवल सेठ
के दर्शनों के लिए आतुर दिखाई दिए। रथ यात्रा के दौरान लगभग 15 क्ंिवटल गुलाब की पांखुडि़यों से की गई पुष्प वर्षा और सतरंगी अबीर गुलाल से होरी खेलते भक्तगणों ने मण्डफिया को गोकुल वृन्दावन के रूप में निरूपित कर दिया। रथ के आगे अपनी ही मस्ती और धुन में नाचते-गाते लोग जहां अपने आराध्य को रिझाने में व्यस्त थे। वहीं गुलाल से होली खेलते हुए भक्तों के मन में सांवलिया के रंग में रंगने की होड़ लगी हुई थी। जिसने जीवन में कभी होली न खेली हो वे भी इस पावन अवसर पर होली का आनन्द लेकर खूब उल्लासित दिखाई दिए। निर्धारित कार्यक्रमानुसार अभिजित मुहुर्त में ज्यों ही मुख्य मंदिर से रजत रथ में विराजित होकर जब सांवलिया सेठ बाहर पधारने लगे तो समूचा वातावरण सांवलिया सेठ के जयकारों और ‘‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की’’ से गुंज उठा। जिससे समूचा वातावरण कृष्ण भक्ति से सराबोर हो गया। रजत रथ के मंदिर से बाहर आते ही मंदिर मण्डल के अध्यक्ष भैरूलाल गुर्जर, मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुरेशचन्द्र, सदस्य ममतेश शर्मा, शोभालाल गाडरी, भंवरदास वैष्णव, मनोहरलाल सोनी, श्रीलाल पाटीदार, मेला मजिस्ट्रेट चेनाराम चैधरी, तहसीलदार रमेश बहेडि़या, पूर्व अध्यक्ष मन्नालाल शर्मा, कन्हैयादास वैष्णव, पूर्व सदस्य सत्यनारायण शर्मा एवं प्रशासनिक अधिकारी भगवानलाल चतुर्वेदी ने सांवलिया जी को माल्यार्पण कर उनकी भाव भीनी अगवानी की। ओसरा पुजारी चुन्नीदास ने चंवर ढुलाते हुए सांवलिया सेठ को नगर भ्रमण का भाव भरा आमंत्रण दिया और फिर चल पड़ी मंथर गति से अनूठी रजत रथ यात्रा जो कोरी डोर परिसर में लगभग 1 घंटे तक रही। इस दौरान चारों और ढोल की थाप, बैण्ड की मधुर धुन, भजन मण्डलियों की गायकी, ढोल, थाली, मांदल की स्वर लहरिया वातावरण को भक्तिरस से रंग रही थी। रथ यात्रा में 50 मालवी ढोल के साथ, पांच बैण्ड, हाथी, घोड़े, ऊंट, ध्वज, निशान, रजत छड़ी, गोटे तथा स्थानीय विद्यालयों की झांकियां अलग ही छटा बिखेर रही थी। यह रथ यात्रा घंटा घर के सामने से राधा-कृष्ण मंदिर, गढी का देवरा, मस्जिद के पास होते हुए कबुतर खाना मार्ग से सांवलिया एनिकट पंहुची। जहां सांवलिया सेठ के साथ ही नगर के अन्य मंदिरों से रथ यात्रा में शामिल बेवाण में विराजित देव प्रतिमाओं को भी जल झुलाकर वहां आरती की गई। इसके पश्चात् जयघोष के साथ यह रथ यात्रा पुनः ब्रह्मपुरी, जैन मोहल्ला, सदर बाजार होते हुए मुख्य मंदिर में पंहुची।
पंजाबी बैण्ड व महाकाल के कलाकारों की प्रस्तुती रही आकर्षक
रजत रथ यात्रा के दौरान पंजाब के भटिण्डा से बलवीरसिंह के नेतृत्व में आए नो सदस्यीय फतह फोजी पाईज बैण्ड की मार्च पास्टिंग व सलामी की प्रस्तुतियों ने जहां दर्शकों को खुब रोमांचित किया वहीं महाकाल की नगरी उज्जैन से आए लोक कलाकारों ने अनूठी वेशभूषा में नृत्य कर सांवलिया सेठ को रिझाने के साथ ही दर्शकों को खुब आनन्दित किया। 
अश्वों के करतबों ने किया रोमांचित
रथ यात्रा के दौरान आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से लगभग 50 अश्व पालकों ने अपने प्रशिक्षित अश्वों के नृत्य एवं रोमांचक करतब प्रस्तुत कर मेलार्थियों को बांधे रखने में कोई कोर कसर नहीं रखी। वहीं ढोल की थाप और बैण्ड की स्वर लहरियों के बीच अश्वों ने भी सांवलिया सेठ को नमन करते हुए उनके प्रति अपनी अगाध आस्था प्रकट की। 
पूरे मार्ग में उमड़ा जन सैलाब
रथ यात्रा के पूरे मार्ग में इतनी अपार भीड़ उमड़ी की यदि सिक्का भी गिर जाए तो धरती को छू नहीं सकता। वहीं मार्ग के दोनों ओर घरों और दुकानों की छतों से अनवरत पुष्प वर्षा कर कस्बा वासियों एवं दुर-दराज से आए भक्तों ने भगवान सांवलिया सेठ की एक झलक पाने में कड़ी मशक्कत की। रथ यात्रा को खींचने के लिए भी श्रृद्धालु में होड़ लगी रही। 
एलईडी की व्यवस्था 
रथ यात्रा के दौरान दर्शकों को अपने आराध्य की सहजता से झलक दिखाने के लिए मंदिर मण्डल द्वारा मण्डफिया के विभिन्न 15 स्थानों पर बड़े-बड़े एलईडी लगाकर मुख्य मंदिर से लेकर रथ यात्रा के समूचे मार्ग के दौरान सभी दृश्यों को दिखाने की विशेष व्यवस्था रही। 
चप्पे-चप्पे पर रही सुरक्षा व्यवस्था
जलझूलनी एकादशी मेले के दौरान मंदिर मण्डल द्वारा जहां 150 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। वहीं पर्याप्त मात्रा में पुलिस बल की तैनातदी से चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चैबन्द रही। इस दौरान मेला मजिस्ट्रेट चेनाराम चैधरी, सहायक मेला मजिस्ट्रेट रमेश बहेडि़या, पुलिस अधीक्षक प्रसन्न कुमार खमेसरा के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नारायणसिंह राजपुरोहित, पुलिस उपअधीक्षक गोपालसिंह कानावत सहित कई थानाधिकारी भी कदम-कदम पर निगाह रखे हुए थे। 
कृष्ण दशावतार की प्रस्तुति ने दर्शकों को किया रोमांचित
जलझूलनी एकादशी मेले के प्रथम दिवस बुधवार रात्रि को मंदिर परिसर के सामने के मंच पर एन.आर. इवेन्ट्स जयपुर के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कृष्ण दशावतार की प्रस्तुति ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस दौरान कलाकारों ने सौलह कलावतार के दस अवतारों को उडि़या संस्कृति के रंग में रंग कर भगवान जगन्नाथ की पावनधरा के विहंगम दृश्य को मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम सांवलिया नगरी में प्रस्तुत कर कृष्ण भक्ति को साकार रूप में प्रकट कर दिया। कलाकारों ने सतरंगी चकाचैंध करने वाली रोशनी के बीच कृष्ण के विभिन्न स्वरूपों को प्रस्तुत कर दर्शकों को तालियां बजाने के लिए विवश कर दिया। कलाकारों ने गणपति बप्पा की आराधना करते हुए मनभावन प्रस्तुतियों के बीच प्रिंस डांस गु्रप द्वारा कृष्ण और राधा का प्रेमाभिनय, कलाकार ने राम नाम रटते हवा में उड़ान भरते बजरंगबली, तिरंगे रंग से सजे 3 निशक्त कलाकार कमलेश पटेल के नेतृत्व में हेरत अंगेज प्रस्तुति देकर लोगों को भवाई कला से रूबरू करा दिया। उन्होने शिव तांडव, फायर डांस प्रस्तुत कर लोगों को अचरज में डाल दिया। वहीं कालिया मर्दन, कृष्ण का रथारोहण, गायक वाहिद भाई द्वारा रामदेव जी के घोड़लिये का भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। इसी मंच पर मध्य रात्रि के बाद म्यूजिक लवर्स एण्ड दीप इवेन्ट्स के कलाकारों द्वारा राजस्थानी एवं लोक नृत्य एवं भजनों की प्रस्तुति देते हुए वातावरण को राजस्थानी संस्कृति से सराबोर कर दिया। पूजा भटनागर ने राजस्थानी गीत के ‘‘बावजी थाका मंदरिया में काई बाजे’’ के साथ कई मनभावन भजन एवं नृत्य प्रस्तुत हुए इस दौरान गायक समीर ने पेरोडी तर्ज पर यह दरबार सुहाना लगता है के साथ केदारनाथ आपदा पर भी प्रस्तुतियां दी। वहीं गोवर्धन बस स्टेण्ड मंच पर रोशन भारती एण्ड गु्रप के कलाकारों ने सांस्कृतिक एवं आर्केस्ट्रा की प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को खुब आनन्दित किया। महेन्द्र अलबेला एण्ड पार्टी नें रामायण की चैपाई के साथ कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए दिवाना राधे का व कीर्तन की है रात जैसे मनभावन भजन प्रस्तुत किए। इसी मंच पर न्यू राजस्थानी आर्केस्ट्रा बस्सी के कलाकारों ने भजनों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी।
शैलेश लोढा ने खूब गुदगुदाया श्रोताओं को
देर रात जमा विराट कवि सम्मेलन 
सांवलिया सेठ के जलझूलनी एकादशी मेले के प्रथम दिन बुधवार रात्रि को रेफरल चिकित्सालय के मंच पर आयोजित अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन में तारक मेहता का उल्टा चश्मा के प्रमुख पात्र शैलेश लोढ़ा ने अपने ही अंदाज में काव्य रचनाओं के माध्यम से लगभग एक घंटे तक श्रोताआंे को न केवल बांधे रखा वरन कई बार उन्हे खिलखिलाकर हंसने और गुदगुदाने पर विवश कर दिया। इस दौरान कई बार श्रोताओं ने वन्स मोर के साथ उन्हे मंच पर जमे रहने के लिए भी विवश कर दिया। उन्होने राजस्थानी भाषा की काव्य रचनाओं को प्रस्तुत करते हुए मारवाड़ा और मेवाड़ी माटी को परवान चढ़ाया। अपनी रचनाओं में शैलेश ने आम आदमी की जिन्दगी से जुड़ी छोटी-छोटी बातों को बहुत ही अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया। उन्होने आंचलिक भाषा में प्रयुक्त कई शब्दों के तिरोहित होने पर चिंता व्यक्त करते हुए उनकी बानगी के साथ उन शब्दों की महत्ता को भी प्रकट किया। उदयपुर की कवयित्री दीपिका माही की मेवाड़ी रचनाओं से पूर्व सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन का संचालन संजय झाला ने करते हुए ख्यातनाम कलाकारों की प्रशंसा के साथ अपनी काव्य रचनाएं भी प्रस्तुत की। विनित चैहान के राष्ट्रीय स्वाभिमान, गीतकार रमेश शर्मा के माटी की गंध के तेवर, राकेश वर्मा के सपने देखो कश्मीर और पाकिस्तान के, विनित चैहान द्वारा पाकिस्तानी वार्ता पर व्यंग्य सहित काव्य रचनाओं ने वातावरण को कई रंगों में रंग दिया। अलीगढ़ के सुरेन्द्र सुकुमार ने नालायक लोग लायक पदो पर, दीपिका माही के बेगा आवजो साहिबा, दिनेश दिग्गज, प्रमोद तिवारी की काव्य रचनाओं ने दर्शकों को खुब आनन्दित किया। कवि सम्मेलन का संयोजन जे0 पी0 दशोरा ने किया। कवि सम्मेलन में पुलिस अधीक्षक प्रसन्न कुमार खमेसरा, मंदिर मण्डल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेशचन्द्र, अध्यक्ष भैरूलाल गुर्जर सहित गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रोता मोजूद थे। प्रारम्भ मंदिर मण्डल की और से आमंत्रित कवियों का उपरना उडा कर स्वागत किया गया। 
मेले का समापन आज
जलझूलनी एकादशी के त्रिदिवसीय मेले का समापन समारोह आज सांय आयोजित होगा। जिसमें मंदिर मण्डल की और से निशक्तजनों को ट्राईसाईकिल वितरण के साथ उल्लेखनीय सेवाओं के लिए प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा। मंदिर परिसर के समीपस्थ मंच पर रात्रि आठ बजे से भुट्टे खाॅ एण्ड पार्टी द्वारा लोक नृत्य एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां होगी। 

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