बरसानें की होरी व मीरा भजनों के साथ भव्य मीरा महोत्सव का आगाज विविध संस्कृतियों के समागम ने बांधा समा

चित्तौड़गढ। गिरधर गोपाल की आराध्या भक्त शिरोमणि मीरा बाई के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मीरा स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित त्रिदिवसीय मीरा महोत्सव का रविवार रात्रि को द्वारिकाधाम में शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर चंद्रमा की धवल चांदनी के साथ अमृत बरसाती फुहारों के बीच लगातार पुष्प वर्षा के साथ राधा कृष्ण की बरसाने की होरी, मीरा
नृत्य नाटिका और मीरा के प्रसिद्ध भजनों की प्रस्तुती के साथ भव्य मीरा महोत्सव का आगाज हुआ। इस आयोजन में सांसद सी पी जोशी मुख्य अतिथि, जिला कलेक्टर वेदप्रकाश अध्यक्ष, विधायक सुरेश धाकड़, प्रधान प्रवीण सिंह राठौड़़, डाॅ ओमानंद सरस्वती ने विशिष्ठ अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलन कर मीरा की छवी पर माल्यार्पण करते हुए कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। प्रारम्भ में राजस्थान के प्रसिद्ध लोकगायक लक्ष्मण भांड ने गणपति वंदना करते हुए ‘‘महाराज गजानंद आओं‘‘ के साथ नृत्योत्सव व मीरा संगीत
महोत्सव का शुभारम्भ किया। मेड़ता से आये भांड ने रंग बरसायों जी, सांवरियों जादू करग्यों जैसे भजन प्रस्तुत कर वातावरण को कृष्ण भक्ति से सराबोर कर दिया। वहीं भजन गायक भूपेंद्र शुक्ला ने मीरा के प्रसिद्ध भजन ‘‘मै तो लीनों गोविंदो मोल तथा कृष्ण कन्हैया जपा करों‘‘ संकिर्तन से वातावरण को मीरा बाई बनाया। वहीं उत्तप्रदेश व मथुरा से आये कलाकारों गिरधर गोपाल एंव साथियों द्वारा मयूर नृत्य की प्रस्तुति देकर मंच पर कान्हा और मयूर को एकाकार कर दिया। इसी दौरान मध्यप्रदेश के डाॅ पल्लवी चिराग के भजन पर कलाकारों ने बधाई एंव संजा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुती दी, जबकि छत्तीसगढ के रायपुर की ममता आहार ने अपने ही अंदाज में मीरा नृत्य नाटिका की प्रस्तुती देकर भक्त शिरोमणि मीरा को जीवंत कर दिया। इस दौरान गुजरात के दीपक मकराणा के दल द्वारा डांडिया रास तथा जुम्मे खां मेवाती की भपंग प्रस्तुती के बीच लोक कथाओं पर आधारित कार्यक्रम ने विविध संस्कृतियों के समागम को प्रकट करते हुए ऐसा समा बांधा की दर्शक देर तक तालिया बजाकर उनका उत्साह वर्धन करते रहे। अतिथियों को स्वागत मीरा स्मृति संस्थान की ओर से संरक्षक डाॅ ओमानंद सरस्वती, अध्यक्ष भंवरलाल सिसोदिया, धनश्याम सिंह राणावत, सत्यनारायण समदानी, ओमप्रकाश ओदिच्य, उषा रांधड़, लक्ष्मी नारायण दशोरा सहित अन्य सदस्यों द्वारा किया गया। इस अवसर पर मीरा स्मृति संस्थान की ओर से आधुनिक संस्कृत पीठ, जगतगुरू रामानंदाचार्य संस्कृत विश्व विद्यालय, अध्यक्ष देवर्षि कला नाथ शास़्त्री को स्व. श्री बी.बी जोशी मीरा सारस्वत सम्मान संस्थान के अध्यक्ष, जिला कलेक्टर व अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार एंव गीतकार डाॅ हरीश को मीरा सम्मान पुरूस्कार तथा डाॅ देवकरण सिंह राठौड़़ को महाकवि गुलाब खंडेवाल को मीरा काव्य पुरूस्कार के लियंे आमंत्रित किया गया था, लेकिन अपर्याय कारणों से वें यहा नहीं पहुंच पाये। देर रात तक चले नृत्योंत्सव एंव मीरा संगीत समारोह में बड़ी संख्या में नगर वासियों, गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने मनभावन कार्यक्रम का भरपूर आनंद उठाया। 
भक्ति रसोत्सव ने देशी-विदेशी पर्यटकों को लुभाया 
मीरा महोत्सव के तहत सोमवार प्रातः दुर्ग स्थित मीरा मंदिर में आयोजित भक्ति रसोत्सव के दौरान प्रस्तुत मीरा भजनों, भाव नृत्य व भक्ति संगीत की प्रस्तुतियों ने दुर्ग भ्रमण के लिये आये देशी-विदेशी पर्यटकों को खूब आनंदित किया वहीं इग्लैण्ड की पाउल कार्क एलिजा बेथ, जेसिस अलवानिया तथा एलेक्स क्लार्क तो मीरा भजनों की प्रस्तुती देखते-देखते ही बरबस ही उनकी आखों से अश्रुधार बह चली। उन्होंने कहा कि ऐसी भक्तिमति मीरा को न केवल या भारत का बल्कि विश्व का गौरव माना जाना चाहिए, जिन्होंने रियासत काल में भक्ति की पराकाष्ठा का उदय कर गिरधर गोपाल की अनूठी भक्ति की। इस कार्यक्रम में हिंदुस्तान जिंक के लोकेशन हैड राजेश कुण्डु मुख्य अतिथि, कर्नल रणधीर सिंह अध्यक्ष तथा
घनश्याम सिंह राणावत विशिष्ठ अतिथि थे। भक्ति रसोत्सव में इलाहबाद के रविंद्र शुक्ला ने मीरा के प्रसिद्ध भजन ‘‘ मै तो गिरधर के घर जाउ, कष्णा ऐसी ज्योत जलादे तथा माई री मैं तो लियों गोविंदो मोल‘‘ प्रस्तुत कर वातावरण को मीरा मयी बना दिया। वहीं उन्होंने गोपियों के दर्द का बखान करते हुए ‘‘कहिये कन्हैया से विरह सहा ना जाये तथा उदो मत कहियों समझाने‘‘ भजन प्रस्तुत कर गोपियों के कृष्ण के प्रति आगाध स्नेह को प्रकट किया। मेड़ता के लोकगायक लक्ष्मण भांड ने मांड शैली में जननी जणे तो ऐसा जण, म्हारा शाम मुरारी, बरसाने बागा में बोले मोर, लावणी तर्ज पर ओ मीरा मंदिर जाणों छोड़़ो,
ओजी रामजी कद मिलण होसी तथा केसरिया बालम पधारों म्हारे देश जैसे मन भावन भजनों से वातावरण को राजस्थानी संस्कृति से सराबोर कर दिया। वहीं छत्तीसगढ की ममता आहार ने मीरा नृत्य नाटिका की मनभावन प्रस्तुती के  साथ भक्त शिरोमणि मीरा को अपनी भावांजलि अर्पित की। इस दौरान ग्वालियर के भूपेंद्र शुक्ल ने मैं तो गिरधर के घर जाउ जैसे मीरा के भजन के साथ ही तान्या त्रिपाठी ने आली मोहे लागें वृंदावन नीकों, पायोजि मैंने रामरतन धन पायों तथा चिट्ठिया ले जारे उधों जैसे भजन प्रस्तुत कर मीरा और कृष्ण की भक्ति को साकार कर दिया। भक्ति रसोत्सव के दौरान कई देशी विदेशी पर्यटक कार्यक्रम का आनंद लेते हुए कैमरे में कैद करते रहे। प्रारम्भ में अतिथियों एंव कलाकारों का संस्थान की ओर से पारम्परिक तरिकें से स्वागत किया गया। संस्थान सचिव समदानी ने विदेशी पर्यटकों को महोत्सव के आयोजन के सम्बंध में जानकारी दी। 
गरबा डांडिया रास आज
मीरा महोत्सव के अंतिम दिन आज रात्रि 8.30 बजे से द्वारिकधाम में गरबा डांडिया रास एंव गैर नृत्य समारोह आयोजित किया जायेगा। संस्थान सचिव एस एन समदानी के अनुसार इस दौरान गुजराती कलाकारों द्वारा गरबा रास, चित्तौड़गढ़़ के कलाकारों द्वारा डांडिया रास एंव जालौर के कलाकारों के गैर नृत्य की प्रस्तुतियां होगी। 
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