वीणा के कलाकारों ने राजस्थानी में रंग दिया मीरा महोत्सव को

चित्तौड़गढ। मीरा स्मृति संस्थान द्वारा आयोजित मीरा महोत्सव के दूसरे दिन शरद पूर्णिमा की धवल चांदनी में द्वारिकाधाम में वीणा कला अकादमी जयपुर के कलाकारों द्वारा दी गई प्रस्तुतियों ने मीरा महोत्सव एंव समूचें वातावरण को राजस्थानी रंग में रंग दिया। वीणा के दीलाबर हुसैन द्वारा भक्त शिरोमणि मीरा के प्रसिद्ध भजन ‘‘ऐसी लागी लगन मीरा होग गई मगन‘‘ तथा ‘‘इतनी शक्ति हमें देना दाता‘‘ भजनों से कार्यक्रम की शुरूआत की। इस मौके पर श्री सांवलिया जी मंदिर मण्डल अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा, एसबीबीजे उदयपुर अंचल की उपमहाप्रबंधक परमजीत कोर, बिरला सीमेंट के चंद्रशेखर ने दीप प्रज्वलित कर
मीरा की छवीं पर

माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। अतिथियों को डाॅ ओमानंद सरस्वती, जुगल किशोर बिड़ला से स्वागत किया वहीं कलाकारों का संस्थान अध्यक्ष भंवरलाल सिसोदिया, सचिव एस एन समदानी, धनश्याम सिंह राणावत, उषा रांधड़, कल्याणी दिक्षित, डाॅ सीमा श्रीमाली, शिव मानधणा आदि ने स्वागत अभिनंदन किया। वीणा की प्रसिद्ध कलाकार सुप्रिया ने कृष्ण भक्ति करते हुए ‘‘थाली भर कर लाई रे खिचड़ो‘‘, सहारा गिरधारी का तथा मेरो राधा रमण गिरधारी जैसे मनभावन भजनों की प्रस्तुति के बीच मनमोहक नृत्यों की प्रस्तुति ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। वहीं केसरिया बालम पधारों म्हारे देश, नथ मारी दीजों जी गिरधारी, लड़ली लुमा-झूमा, ढोला ढोल बजिरा बाजे जैसे प्रसिद्ध लोकगीतों पर नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को तालियों से संगत के लिये विवश कर दिया। वहीं सारे गा मा पा व जीटीवी फेम बालिका वधू के टाईटल सोंग छोटी सी उमर में

परणाई ओ बाबोसा जैसे लोकगीत ने बाल विवाह की वेदना को उजागर किया। वहीं चांद चढ्यों गिरनार, मोर बोले रे, बीरा बंजारा रे, चिरमी का डाला चार वारी जाउ चिरमी रे, म्हारी हथेलिया रे छाला पड़़ग्या जैसे लोकगीतों के माध्यम से कलाकारों एंव गायकों ने अपनी कला मर्मज्ञता की अनूठी छाप छोड़़ी। मोरिया आछो बोलियों रे ढलती रात में की भाव पूर्ण प्रस्तुति के साथ ही गोल्डन वोईस खिताब विजेता दिलावर हुसैन और सुप्रिया ने या तो काज्ल्यों बनालु, हिवड़े से दूर मत जायें तथा पल्लों लटके गौरी को पल्लो लटके लोकगीतों ने राजस्थानी लोक संस्कृति को जीवंत कर दिया। वहीं युगल नृत्य में बाई सा रा बिरा जयपुर जायजो री, पायल म्हारी खनके बिंदिया चमके, कोरे काज्ल्या री कोर तथा म्हारो छेल भंवर जैसे लोकगीत व नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। वहीं घूमर रास की प्रस्तुति ने वातावरण में तीज त्यौहारों को जीवंत कर दिया। इस अवसर पर जिला कलेक्टर वेदप्रकाश एंव श्री सांवरिया मंदिर मण्डल अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ने बालिका वधू के प्रमुख गीत ‘‘छोटी सी उमर में‘‘ गीत के बारे में सुप्रिया की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। वीणा केसेट्स के निर्देशक प्रसेनजीत मालू के निर्देशन मंे बताया कि भारतीय नृत्यों में घूमर देश विदेश में नृत्य विधा के चैथे स्थान पर है। प्रारम्भ में संस्थान सचिव समदानी ने महोत्सव की महत्ता एंव संस्थान की भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला।

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