सिंहस्थ में संतों के सानिध्य से सही दिशा मिली – मुख्यमंत्री श्री चौहान मुख्यमंत्री ने दी स्वामी अवधेशानंदजी को भावभीनी आत्मीय बिदाई

उज्जैन । सिंहस्थ सानंद सम्पन्न हुआ। मन प्रसन्नता और आनंद से भरा हुआ है। महाकाल की कृपा से पूरी टीम ने सिंहस्थ में अंतरआत्मा की गहराईयों से सेवाएं दी और उत्कृष्ट काम करने का प्रयास किया। सिंहस्थ में संतों के सानिध्य में रहने से सही दिशा मिली। यह बात मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने बुधवार को स्वामी श्री अवधेशानंदजी गिरी के सिंहस्थ शिविर में उनकी बिदाई में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अपनी धर्मपत्नी के साथ स्वामीजी से भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया तथा मुख्यमंत्री ने सपत्नीक स्वामी श्री अवधेशानंदजी को शाल, श्रीफल एवं अंगवस्त्रम भेंट कर उन्हें आत्मीय भवभीनी बिदाई दी। इस मौके पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री पारस जैन, सिंहस्थ केंद्रीय समिति के अध्यक्ष श्री माखनसिंह चौहान, विकास प्राधिकरण अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्री हरिगिरीजी, जूना अखाड़ा के श्रीमंहत प्रेमगिरी जी, श्री उमाशंकर भारती जी, संभागायुक्त डॉ रवींद्र पस्तौर, प्रमुख सचिव जनसंपर्क श्री एस के मिश्र, एडीजीपी श्री व्ही मधुकुमार, डीआईजी श्री राकेश गुप्ता, कलेक्टर कवींद्र कियावत एवं पुलिस अधीक्षक श्री मनोहरसिंह वर्मा भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर श्री अवधेशानंदजी गिरी महाराज के सिंहस्थ छावनी से बिदाई के अवसर पर कहा कि सिंहस्थ में सभी अधिकारी कर्मचारी न केवल नौकरी कर रहे थे, बल्कि सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ में उज्जैन को जो सौगातें मिली हैं वह यथावत रहें उनका संधारण होता रहे। जो पेड़ पौधे लगे हैं वे सूखने न पाएं घाट भी अच्छे बने रहें उनकी देखरेख हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंहस्थ महापर्व के समापन के बाद उज्जैन व शिप्रा के तट सूने-सूने से लग रहे हैं और आज स्वामीजी भी यहां से विदा ले रहे हैं तो ह्रदय भी सूना लग रहा है। उन्होंने कहा कि स्वामी जी को देश दुनिया में ज्ञान की गंगा बहाने जाना पड़ता है। मैं उन्हें विदा करने आया हूं उनसे आग्रह करता हूं कि वे बार-बार मध्यप्रदेश आते रहें। स्वामी अवधेशानंदजी ने सबको जोड़ने का काम किया है। स्वामी श्री अवधेशानंदजी गिरी ने अपने आशीर्वचन में प्रदेश की सुख समृद्धि, उन्नति, उत्कृष्टता और वैभव की भगवान महाकाल से प्रार्थना करते हुए कहा कि यहां के कृषक, शिल्पी, प्रजा, शासक, प्रशासक, उपासक आदि सभी सुखी रहें, प्रसन्न रहें। उन्होंने कहा कि जूना अखाड़े के दातार अखाड़े में मंगलवार को आचार्य पीठ की स्थापना हुई है। यह पीठ विद्या का केंद्र बनेगी। इस पीठ में विद्या का वास होगा। मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान बुधवार को स्वामी श्री अवधेशानंद जी की विदाई के बाद उनके साथ ओंकारेश्वर के लिए रवाना हो गए।
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